LIC ने निजी बैंकों से अपनी हिस्सेदारी घटाई, PSU बैंकों में बढ़ाई निवेश रणनीति

मुंबई। भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी LIC ने अपनी इक्विटी पोर्टफोलियो में रणनीतिक बदलाव किया है — जिन्होंने बाजार में हलचल मचा दी है।

  • LIC ने हाल-ही में निजी क्षेत्र के शीर्ष बैंकों जैसे HDFC Bank, ICICI Bank और Kotak Mahindra Bank में अपनी हिस्सेदारी कम की है।
  • इसके विपरीत, LIC ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों — जैसे State Bank of India (SBI) और Yes Bank — में निवेश बढ़ाया है।
  • इस कदम को “कंट्रोल किए हुए जोखिम के माहौल में स्थिर और सुरक्षित निवेश की तरफ़ वापसी” के रूप में देखा जा रहा है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

  • LIC का इस तरह का पोर्टफोलियो री-शेपिंग संकेत देता है कि वह अब उच्च मूल्य + कम जोखिम वाले सार्वजनिक बैंकिंग फ्लिप्टर्स की दिशा में देख रही है।
  • इससे यह भी महसूस होता है कि LIC निजी बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते प्रतिस्पर्धा और बदलावों के चलते अस्थिरता को कम करना चाह रही है।
  • निवेशकों के लिए यह संदेश है: “LIC भरोसेमंद विकल्पों की ओर लौट रही है” — जो विशेष रूप से उन पॉलिसीधारकों के लिए अच्छा तथ्य हो सकता है, जो सुरक्षा-उन्मुख हैं।

इसका असर पॉलिसीधारकों पर क्या होगा

  • यदि आप LIC की पॉलिसीधारक हैं या ले रहे हैं, तो यह बदलाव आपके लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकता है — कंपनी अपने निवेश को ज्यादा स्थिर दिशा दे रही है।
  • हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि इस रणनीति का बेहद जल्द परिणाम न मिले — यह दीर्घकालीन दृष्टिकोण है।
  • आप अपनी पॉलिसी की मॅच्योरिटी वैल्यू, बोनस अनुमान और प्रीमियम समीक्षा करते समय इस प्रकार के बदलावों को ध्यान में रखें — क्योंकि बीमा कंपनी की वित्तीय स्थिति भी आपके लिए मायने रखती है।

क्या करे ?

  • अपनी LIC पॉलिसी की शर्तें एक बार दोबारा देखें: मॅच्योरिटी तारीख, बोनस अनुमान, जोखिम कवरेज आदि।
  • यदि अब भी आपने अपनी पॉलिसी के साथ अन्य निवेश नहीं जोड़े हैं, तो “सुरक्षा (LIC) + वृद्धि (म्यूचुअल फंड्स या अन्य निवेश)” का संतुलन बनाने पर विचार करें।
  • ऐसे समय में जब कंपनी पोर्टफोलियो बदल रही हो, खबरों पर नज़र रखना महत्वपूर्ण है — क्योंकि ये बदलाव भविष्य में आपकी पॉलिसी के लाभों को प्रभावित कर सकते हैं।

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